Akhilandeswari Stotram( Sanskrit lyrics)

 

अखिलंदेश्वरी स्तोत्रम




 

अष्टमे क्षेत्रम अगथ्य गजरण्यम गिरेसुथा,

कीलाला लिंगम संस्थप्य पूजायामास सस्दारम

 

ब्रह्मो उवाचा:-

नमोस्तु सौवर्ग महीरुहोठकारा प्रसून सौरभ्य निरंथरालके,

नमोस्तु सप्तष्ट कल्थमा सीठे रुग्विदम बना चुनचरा फल पटिके|| 1 ||

नमोस्तु करुण्य सुधा तरंगिणी चारिष्णु मीनायुथा चारु वीक्षणे

नमोस्तु थडंगा लसन मणि प्रभा निकाय नीरंजीता गंडा फलिके || 2 ||

नमोस्तु बंधकलंथन विध्रुमा प्रवाल बिम्बि फला पातालधरे

नमोस्तु मंदस्मिथ माधुरी सुधरी परीक्षाल मुखेंधु मंडले॥ 3 ||

नमोस्तु पुष्पायुध वीरा विक्रमप्रधान समुध गोशनसंखकंधारे

नमोस्तु हारा वली जान्हु कन्याकप्ररिश्कृत भोग कुच्छक्षमाधरे॥ 4 ||

नमोस्तु कंधरपा हरोप गोहना प्रमोद रोमंचिता बहू वल्लिके

नमोस्तु वैभथिका सोना वारिजा प्रभासद्रुक्षश्चवि पाणि पल्लवे|| 5 ||

नमोस्तु तुंग स्थान भर दुर्यथा समुन मिशत कर्मयोग्न मध्यमे

नमोस्तु भूदेसा जयर्थस संभ्रम स्मरग्नि गुंदयिता नाभि मंडले|| 6 ||

नमोस्तु विस्थेरणा निठम्बा मंडली राधांगा चक्र ब्रमिथेसा मनसे,

नमोस्तु लक्ष्मी रमनाधि देवता समुत्करोमसिथा पद पंकजे॥ 7 ||

नमोस्तु निर्नीन्द्र सिठेथारांबुजाप्रभोमेयांगा मरीचि मंजरी

नमोस्तु नमराभि मत प्रधायिके नमो नमस्ते तव अखिलंदा नायके|| 8 ||

देव देवस्य महतो देवस्य गृह मेधिनी,

माया वद्रुष्टा भवति मथथप फलम || 9 ||

कस्मादेतवादिम भूमिम अगाथा त्वं हर प्रिये,

त्वाड दर्शनेन नियतम पूतथाथमासु द्रुस्याथे

अध्‍याध्‍वरा फलम द्रुष्‍तम अध्‍य विद्या प्रयोगम,

अध्ययन थापा सिद्धि देवी त्वद दर्शनन मम।

अगम्यम वेद सिरसां अप्राप्यम शास्त्र सम्पधाम,

आगानाम चदुष्प्रपं तव सर्वनि दर्शनम।

अनेक तीर्थ निलयथ आकारिता थापा फलाथ,

देवर्षिमानसोल्लास कैलाससस्थि तत् पदम्।

भक्तानुकम्पा सुलभम भव निसि सेखरम,

अविनाशाभवरा सीकम विनाथवम कदम अगाथा।

इथि श्री पद्मेय पुराणे गजरण्य महत्म्ये ब्रह्म स्तुतिर नाम अष्टमोध्याय

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